Friday, July 31, 2026

विद्वान शिक्षाविद् डॉ. दिनेश प्रसाद रतूड़ी को सेवनिवृति पर भावभीनी विदाई : यादों से नम हुईं आंखें, योगदान को किया गया नमन

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड के वरिष्ठतम् प्रवक्ता एवं प्रतिष्ठित शिक्षाविद् डॉ. दिनेश प्रसाद रतूड़ी के सेवानिवृत्त होने पर संस्थान के सभागार में एक गरिमामय एवं भावनात्मक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। यह अवसर केवल एक अधिकारी की सेवा निवृत्ति का नहीं, बल्कि शिक्षा, शोध, प्रशिक्षण और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण तीन दशक से अधिक की प्रेरणादायी यात्रा को सम्मानपूर्वक स्मरण करने का अवसर था।

सभागार में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति की आँखें उस समय नम हो उठीं जब डॉ. रतूड़ी के साथ बिताए गए वर्षों की स्मृतियाँ एक-एक कर मंच से साझा की गईं। पूरा वातावरण सम्मान, आत्मीयता और भावनाओं से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

कार्यक्रम में निदेशक अकादमिक बंदना गर्ब्याल, अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी, उपनिदेशक विनोद  मतूड़ा, सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवाण सहित संस्थान के अनेक अधिकारी, संकाय सदस्य एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन  सुनील भट्ट ने किया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रिया  गुसाईं द्वारा एवं मनमोहक नृत्य प्रस्तुति से हुआ, जिसके माध्यम से डॉ. रतूड़ी एवं उनके परिवार का अभिनन्दन किया गया। इस अवसर पर डॉ. रतूड़ी की आदरणीय सासू माँ का पुष्पगुच्छ से स्वागत निदेशक बंदना गर्ब्याल ने किया, जिसने पूरे समारोह को पारिवारिक आत्मीयता का स्वरूप प्रदान किया।

समारोह का विशेष आकर्षण SCERT के आईटी विभाग द्वारा तैयार की गई डॉ. दिनेश रतूड़ी के जीवन, सेवाओं एवं शैक्षिक योगदान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री रही।


डॉक्यूमेंट्री में उनके प्रारम्भिक शिक्षकीय जीवन से लेकर SCERT उत्तराखण्ड में किए गए महत्वपूर्ण नवाचारों, शोध कार्यों, पाठ्यपुस्तक विकास, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, मूल्यांकन सुधार, PARAKH, NAS, समग्र शिक्षा, कौशलम, स्कूल हेल्थ एवं वेलबीइंग, प्रश्न बैंक विकास, शोध अध्ययनों तथा राज्य के शैक्षिक सुधारों में निभाई गई उनकी अग्रणी भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

एक शिक्षाविद् जिनका सम्पूर्ण जीवन शिक्षा को समर्पित रहा

डॉ. दिनेश प्रसाद रतूड़ी का जन्म 4 जुलाई को हुआ। उन्होंने एम.एससी. (जूलॉजी), एम.एड. एवं डी.फिल. (शिक्षा) जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएँ प्राप्त कीं। वर्ष 1995 में उन्होंने राजकीय सेवा में जीव विज्ञान प्रवक्ता के रूप में कार्य प्रारम्भ किया तथा बाद में DIET, SIEMAT एवं अंततः SCERT उत्तराखण्ड में अपनी सेवाएँ प्रदान कीं।

लगभग तीन दशकों के अपने सेवाकाल में उन्होंने शिक्षा विभाग में प्रशिक्षण, पाठ्यचर्या विकास, शोध, मूल्यांकन, विज्ञान शिक्षा, शिक्षक क्षमता निर्माण और शैक्षिक नवाचारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए।

डॉ. रतूड़ी ने अपने कार्यकाल के दौरान अनेक राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की पहलों का नेतृत्व किया। इनमें प्रमुख रूप से—

  •     क्षमता आधारित (Competency Based) प्रश्नों का विकास
  •     Learning Outcomes आधारित शिक्षक डायरी का निर्माण
  •     NMMSS एवं विभिन्न राज्य स्तरीय परीक्षाओं के प्रश्नपत्र निर्माण
  •     PARAKH राष्ट्रीय सर्वेक्षण का क्रियान्वयन
  •     NAS आधारित अध्ययन एवं डिपस्टिक रिसर्च
  •     स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम का प्रभाव अध्ययन
  •     एक्शन रिसर्च का संचालन
  •     शिक्षक प्रशिक्षण मॉड्यूल का विकास
  •     समग्र शिक्षा के अंतर्गत विज्ञान एवं कौशलम कार्यक्रमों में KRP के रूप में योगदान
  •     स्कूल हेल्थ एवं वेलबीइंग कार्यक्रम
  •     बाल वाटिका प्रशिक्षण
  •     भाषा, विज्ञान, आपदा प्रबंधन, रोड सेफ्टी एवं गतिविधि पुस्तकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका
  •     पाठ्यपुस्तकों के संपादन, प्रूफ रीडिंग एवं संशोधन
  •     राज्य भर के शिक्षकों, प्रधानाचार्यों एवं शिक्षा अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण साहित्य का निर्माण

उन्होंने SCERT में शोध, सर्वेक्षण, मूल्यांकन, पाठ्यचर्या विकास तथा प्रशिक्षण की अनेक परियोजनाओं को सफलतापूर्वक दिशा प्रदान की।

    


कार्यक्रम में साधना डिमरी, भुवनेश पंत, रमेश बडोनी, विनय थपलियाल, मनोज बहुगुणा, डॉ. मनोज शुक्ला, डॉ. आलोक प्रभा सहित अनेक प्रवक्ताओं एवं अधिकारियों ने डॉ. रतूड़ी के साथ कार्य करने के अनुभव साझा किए। कई वक्ता अपने संस्मरण सुनाते हुए भावुक भी हो उठे।
सभी वक्ताओं ने कहा कि—

"डॉ. रतूड़ी केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक रहे जिन्होंने सदैव शांत स्वभाव, विनम्र व्यवहार, गहन अध्ययन और सकारात्मक सोच से पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया।"

निदेशक अकादमिक बंदना गर्ब्याल ने कहा कि डॉ. दिनेश रतूड़ी ने SCERT की शैक्षणिक गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका अनुशासन, शोधपरक दृष्टिकोण और संस्थान के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा रहेगा। उन्होंने उनके स्वस्थ, सक्रिय एवं सुखद जीवन की कामना करते हुए कहा कि संस्थान सदैव उनके अनुभवों से मार्गदर्शन प्राप्त करता रहेगा और मुझे आशा है आप हमसे जुड़े रहेंगे । इस  अवसर पर निदेशक ने उन्हे एक विशेष पुस्तक भी उपहार स्वरूप भेंट की । 

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी उन्होंने कहा कि डॉ. रतूड़ी ने प्रत्येक कार्य को अत्यंत गंभीरता, ईमानदारी और गुणवत्ता के साथ पूरा किया। शिक्षा के प्रति उनका समर्पण, सरल व्यक्तित्व और सहयोगी स्वभाव उन्हें सदैव विशिष्ट संस्थान बनाता है। पूर्व अपर निदेशक प्रदीप रावत ने दोनों भाइयों की तारीफ करते हुए उन्हे जीवन के इस क्षण को बेहतर बतया ।

उपनिदेशक विनोद मतूड़ा कहा कि डॉ. रतूड़ी का प्रशासनिक अनुभव, शैक्षणिक दृष्टि तथा संस्थागत विकास में योगदान आने वाले अधिकारियों के लिए अनुकरणीय रहेगा। उनकी कार्यशैली सदैव प्रेरणा देती रहेगी और इस अवसर पर उन्हे एक पुस्तक भी भेंट की। सहायक निदेशक डॉ. के. एन. बिजलवाण ने अपने पुराने साथी को याद करते हुए डॉ. बिजलवाण ने कहा कि उनके साथ बिताया गया समय जीवन की अमूल्य धरोहर है। अनेक परियोजनाओं में साथ कार्य करते हुए उन्होंने डॉ. रतूड़ी की कार्यनिष्ठा, सकारात्मक सोच एवं टीम भावना को निकट से देखा है। उन्होंने कहा कि उनके जैसे सहयोगी विरले ही मिलते हैं।

समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया जब डॉ. रतूड़ी के छोटे भाई प्रवक्ता दीपक रतूड़ी ने अपने बचपन की स्मृतियाँ साझा करते हुए कहा—

"मेरे लिए बड़े भाई नहीं, बल्कि पिता समान रहे हैं। उन्होंने सदैव पूरे परिवार का मार्गदर्शन किया और अपने जीवन से आदर्श स्थापित किए।"


डॉ. रतूड़ी की धर्मपत्नी, पुत्री एवं बहु ने भी उनके संघर्ष, समर्पण और संस्थान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करते हुए गर्व व्यक्त किया।

विदेश एवं अन्य स्थानों पर रह रहे परिवारजनों के वीडियो संदेश भी सभागार में प्रदर्शित किए गए, जिन्हें देखकर पूरा वातावरण भावुक हो उठा।

विनम्रता ही रही सबसे बड़ी पहचान

डॉ. रतूड़ी का व्यक्तित्व सदैव सादगी, विनम्रता और कर्मप्रधान सोच का प्रतीक रहा। वे स्वयं अपने कार्यों का प्रचार करने के बजाय उन्हें अपनी जिम्मेदारी मानते रहे। यही कारण है कि सहकर्मी उन्हें एक श्रेष्ठ शिक्षक, शोधकर्ता, प्रशिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में याद करते हैं।

प्रेरणा

डॉ. दिनेश प्रसाद रतूड़ी की सेवा यात्रा यह संदेश देती है कि शिक्षा केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अपने ज्ञान, अनुभव और व्यवहार से हजारों शिक्षकों, अधिकारियों और विद्यार्थियों के जीवन को प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से प्रभावित किया।

अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी एवं निदेशक अकादमिक बन्दना गर्ब्याल  एवं SCERT उत्तराखण्ड परिवार उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए कृतज्ञ है तथा उनके स्वस्थ, सुखद एवं सक्रिय जीवन की मंगलकामना करता है।

डॉ दिनेश रतूडी के शब्दों के संयोजन मे भी करुणा ऐसा कहते है सौरभ जोशी आई टी विभाग -