Wednesday, October 07, 2026

कुमाऊँ मंडल में कौशलम् कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 9 एवं 12 के मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण

SUNILBHATT, SCERT

अल्मोड़ा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड के मार्गदर्शन में कौशलम् कार्यक्रम के अंतर्गत कुमाऊँ मंडल में कक्षा 9 एवं 12 हेतु मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), अल्मोड़ा में प्राचार्य एवं समस्त फैसिलिटेटर्स के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य मास्टर ट्रेनर्स को कौशलम् की अवधारणा, उद्यमशील मानसिकता तथा अनुभवात्मक एवं परियोजना-आधारित शिक्षण की प्रक्रिया से जोड़ते हुए इस प्रकार तैयार करना है कि वे अपने-अपने जनपदों में शिक्षकों को प्रभावी प्रशिक्षण प्रदान कर सकें।

प्रशिक्षण में कक्षा 9 के लिए विद्यार्थियों में समस्या की पहचान (Problem Identification) तथा समस्या-समाधान (Problem Solving) की क्षमता विकसित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को अपने आसपास एवं दैनिक जीवन की समस्याओं को पहचानने, उनके कारणों को समझने, संभावित समाधानों पर विचार करने तथा व्यावहारिक समाधान विकसित करने की प्रक्रिया से जोड़ने के लिए गतिविधि-आधारित सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

इसी प्रकार कक्षा 12 में विद्यार्थियों की रुचि-आधारित परियोजनाओं (Interest-Based Projects) पर विशेष रूप से कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी रुचियों और क्षमताओं को पहचानने, अपने विचारों को वास्तविक जीवन से जोड़ने, उन्हें परियोजना का स्वरूप देने तथा उनके क्रियान्वयन के माध्यम से भविष्य एवं करियर की दिशा पर विचार करने के अवसर उपलब्ध कराना है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्राचार्य, डायट अल्मोड़ा ललित मोहन पांडे ने कौशलम् कार्यक्रम की आवश्यकता एवं वर्तमान सदी में जीवन और कार्य-जगत के लिए आवश्यक कौशलों के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक एवं व्यावसायिक परिवेश में विद्यार्थियों को केवल विषयगत ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनमें समस्या-समाधान, रचनात्मकता, संवाद, सहयोग, निर्णय लेने और पहल करने जैसी क्षमताओं का विकास भी आवश्यक है।

डॉ. हेम जोशी, प्रवक्ता, डायट अल्मोड़ा ने मास्टर ट्रेनर्स की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्हें प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभवों एवं प्रक्रियाओं को अपने-अपने जनपदों के शिक्षकों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का मंच संचालन श्री अशोक वनकोटी, जिला कार्यक्रम समन्वयक, कौशलम् द्वारा किया गया।

प्रशिक्षण के प्रारंभिक सत्र में श्री सुनील भट्ट, प्रवक्ता, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तराखण्ड एवं राज्य समन्वयक, कौशलम् कार्यक्रम द्वारा कौशलम् की अवधारणा, कार्यक्रम की आवश्यकता, उद्यमशील मानसिकता के विकास तथा कक्षा 9 एवं 12 में कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कौशलम् का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किसी विषय की जानकारी देना नहीं, बल्कि उनमें स्वतंत्र चिंतन, समस्या की पहचान, समस्या-समाधान, सहयोग, संवाद, रचनात्मकता, दृढ़ता (Grit) तथा स्वयं पहल करके सीखने की प्रवृत्ति विकसित करना है।

इसके पश्चात कौशलम् की मास्टर ट्रेनर श्रीमती शुभ्रा सिंघल, प्रवक्ता, SCERT, तथा सहयोगी संस्था उद्यम लर्निंग फाउंडेशन की ओर से पुणे, महाराष्ट्र से आई रिसोर्स पर्सन सुश्री रचना, गुजरात से सुश्री अवनी, श्री दिनेश पवार एवं अन्य रिसोर्स पर्सन्स द्वारा विभिन्न गतिविधियों, समूह-कार्य, चर्चा, चिंतन एवं अनुभवात्मक प्रक्रियाओं के माध्यम से प्रशिक्षण का प्रभावी फैसिलिटेशन किया जा रहा है।

प्रशिक्षण की विशेषता यह है कि मास्टर ट्रेनर्स को केवल प्रशिक्षण सामग्री समझाने तक सीमित न रखते हुए उन्हें स्वयं गतिविधियों में सहभागी बनाया जा रहा है, ताकि वे ‘करके सीखने’ (Learning by Doing) की प्रक्रिया को अनुभव कर सकें। इससे वे अपने जनपदों में आयोजित होने वाले शिक्षक प्रशिक्षणों में केवल प्रशिक्षक की नहीं, बल्कि एक प्रभावी Facilitator की भूमिका निभा सकेंगे।

इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रयास है कि मास्टर ट्रेनर्स से प्राप्त सीख जनपद स्तर के प्रशिक्षणों के माध्यम से शिक्षकों तक और अंततः कौशलम् की कक्षाओं में विद्यार्थियों तक पहुँचे। इस प्रकार SCERT → Master Trainer → Teacher → Student की पूरी अकादमिक श्रृंखला में कौशलम् की मूल भावना एवं उसकी शिक्षण-पद्धति को प्रभावी रूप से स्थापित किया जा सके।


कौशलम् कार्यक्रम की मूल भावना को इस विचार में समेटा जा सकता है—

“सीखना केवल जानना नहीं है; सीखना है—करके देखना, समस्या को पहचानना, उसका समाधान खोजना और अपने विचार को वास्तविकता में बदलना।”

यह प्रशिक्षण इसी सोच को विद्यालय और कक्षा तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, ताकि उत्तराखण्ड के विद्यार्थी केवल परीक्षाओं के लिए तैयार न हों, बल्कि जीवन, भविष्य और बदलती दुनिया की चुनौतियों के लिए भी तैयार हों।