अजमेर, 10 अक्टूबर 2026। क्षेत्रीय शिक्षण संस्थान (RIE), NCERT अजमेर में 5 से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में मिडिल स्टेज के सामाजिक विज्ञान शिक्षण में भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge Systems–IKS) के प्रभावी समावेशन पर विशेष मंथन किया गया। इस ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण में उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला में भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल अवधारणाओं, प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास तथा सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं प्रमाणों के साथ कक्षा-कक्ष शिक्षण से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया। विभिन्न राज्यों के शिक्षकों ने अपने क्षेत्रों की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक श्रेष्ठ परंपराओं को साझा कर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार किया।
उत्तराखंड से छह शिक्षकों ने किया प्रतिभाग
प्रशिक्षण में उत्तराखंड से छह प्रतिभागी शामिल हुए—
- रविदर्शन तोपाल
- डॉ. ताजबर पड़िहार – देहरादून
- दीपिका श्रीवास्तव – टिहरी गढ़वाल
- सुरेंद्र कंडवाल – चमोली
- शीशपाल पंवार – रुद्रप्रयाग
- चंद्रा अधिकारी – चंपावत
प्रशिक्षण के अतिरिक्त प्रतिभागियों ने अजमेर एवं पुष्कर के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों, जिनमें ब्रह्मा मंदिर, सावित्री मंदिर, जैन मंदिर तथा ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह शामिल हैं, का शैक्षिक भ्रमण किया। इस दौरान भारतीय स्थापत्य कला, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक जीवन का प्रत्यक्ष अवलोकन भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बना।
विशेष आभार एवं शैक्षिक उपलब्धि
प्रतिभागियों ने RIE अजमेर के विद्वान संकाय सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। विशेष रूप से डॉ. गणेश जोशी, असिस्टेंट प्रोफेसर, RIE अजमेर एवं उत्तराखंड के नोडल मार्गदर्शक, के योगदान की सराहना की गई। उत्तराखंड की धरती से जुड़े डॉ. जोशी भारतीय ज्ञान परंपरा एवं शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सेवाएँ दे रहे हैं।
यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप भारतीय ज्ञान, वैज्ञानिक चिंतन और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुआ। प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव उत्तराखंड के विद्यालयों में सामाजिक विज्ञान शिक्षण को अधिक संदर्भपरक, अनुभवात्मक और समृद्ध बनाने में सहायक होंगे।



