आगरा, उत्तर प्रदेश | 27–28 अक्टूबर 2026
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के दूरदर्शी संकल्पों को धरातल पर उतारने तथा देश में शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता, व्यावसायिक दक्षता और सतत व्यावसायिक विकास को नई दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से ताजनगरी आगरा में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "समर्थ शिक्षक–सशक्त भारत" का भव्य शुभारंभ हुआ।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के जयप्रकाश सभागार में 27 एवं 28 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में शिक्षक शिक्षा के भविष्य, डिजिटल नवाचार, व्यावसायिक मानकों और प्रभावी मेंटरिंग व्यवस्था पर विशेष मंथन किया जा रहा है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया सम्मेलन का उद्घाटन
सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।
उद्घाटन समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेंद्र उपाध्याय, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा, डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी तथा संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान के निदेशक प्रो. चांद किरण सलूजा सहित अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी का विशेष वीडियो संदेश भी प्रसारित किया गया। उन्होंने शिक्षक शिक्षा में सुधार, व्यावसायिक विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था को विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
NPST और NMM के माध्यम से शिक्षक शिक्षा को मिलेगी नई दिशा
आगामी शैक्षणिक सत्र 2026–27 के दृष्टिगत आयोजित इस सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षक व्यावसायिक मानक (National Professional Standards for Teachers – NPST) तथा राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन (National Mission for Mentoring – NMM) के चरणबद्ध क्रियान्वयन को प्रभावी बनाना है।
सम्मेलन में विशेष रूप से शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षताओं के मानकीकरण, अनुभवी शिक्षकों द्वारा नवप्रवेशी शिक्षकों के मार्गदर्शन, डिजिटल ऑनबोर्डिंग, संस्थागत क्षमता निर्माण तथा सतत व्यावसायिक विकास की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
इन पहलों का उद्देश्य शिक्षक को केवल पाठ्यक्रम संचालक के रूप में नहीं, बल्कि एक कुशल मार्गदर्शक, नवाचारी शिक्षाविद्, चिंतनशील अभ्यासकर्ता और आजीवन शिक्षार्थी के रूप में विकसित करना है।
समावेशी शिक्षा की प्रेरक पहल
सम्मेलन की एक विशेष उपलब्धि कार्यक्रम संचालन में सांकेतिक भाषा (Sign Language) का समानांतर उपयोग रहा। यह पहल समावेशी शिक्षा, समान अवसर और सभी के लिए सुगम संवाद के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है।
डिजिटल नवाचार और व्यावसायिक विकास पर विशेष बल
वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल शिक्षण संसाधन, ऑनलाइन प्रशिक्षण और तकनीक-सक्षम शिक्षण पद्धतियाँ शिक्षक शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं।
ऐसे में NPST और NMM जैसी राष्ट्रीय पहलों का प्रभावी क्रियान्वयन शिक्षकों के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, सहयोगात्मक अधिगम, पेशेवर मार्गदर्शन और नवाचार आधारित शैक्षिक वातावरण विकसित करने में सहायक हो सकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षक क्षमता निर्माण की यह प्रक्रिया विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
समर्थ शिक्षक से ही बनेगा सशक्त भारत
दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "समर्थ शिक्षक–सशक्त भारत" शिक्षक शिक्षा में गुणवत्ता, उत्तरदायित्व, नवाचार और व्यावसायिक उत्कृष्टता को संस्थागत स्वरूप प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
यह सम्मेलन इस विचार को रेखांकित करता है कि एक सशक्त शिक्षा व्यवस्था की आधारशिला समर्थ, प्रशिक्षित, संवेदनशील और नवाचारी शिक्षक ही हैं।
शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास, प्रभावी मेंटरिंग और तकनीकी सशक्तीकरण के माध्यम से ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की परिकल्पनाओं को विद्यालयों की वास्तविक शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में प्रभावी रूप से साकार किया जा सकता है।
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