मुख्य सेवक सदन, देहरादून में नवसाक्षरों और स्वयंसेवकों का सम्मान; शिक्षा, आत्मनिर्भरता और जनभागीदारी का दिया संदेश
देहरादून, 06 अक्टूबर 2026।
उत्तराखण्ड की साक्षरता यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि का उत्सव मनाते हुए मुख्य सेवक सदन, देहरादून में “उल्लास पर्व” का गरिमामय आयोजन किया गया। यह अवसर उत्तराखण्ड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने की उपलब्धि के साथ-साथ उन हजारों स्वयंसेवकों, शिक्षकों, अधिकारियों और नवसाक्षरों के सामूहिक प्रयासों को सम्मानित करने का भी रहा, जिन्होंने राज्य के दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों तक साक्षरता की ज्योति पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री, माननीय शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, माननीय विधायक कैंट, शिक्षा सचिव ज्योति यादव, भारत सरकार की अपर सचिव अर्चना शर्मा अवस्थी, अपर शिक्षा सचिव नमामि बंसल, NCERT के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण/SCERT उत्तराखण्ड बंदना गर्ब्याल तथा अपर निदेशक SCERT उत्तराखण्ड पद्मेंद्र सकलानी सहित SCERT उत्तराखण्ड एवं शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, नवसाक्षर, स्वयंसेवी, शिक्षक एवं अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।
साक्षरता गीत से हुआ उल्लास पर्व का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षा सचिव ज्योति यादव द्वारा सभी अतिथियों के स्वागत एवं अभिनंदन के साथ किया गया। इसके पश्चात डायट ऊधमसिंह नगर के प्रशिक्षणार्थियों ने प्रेरणादायी साक्षरता गीत प्रस्तुत कर शिक्षा, जागरूकता और आजीवन सीखने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण नवसाक्षरों और स्वयंसेवकों द्वारा साझा किए गए अनुभव रहे। इन अनुभवों ने यह रेखांकित किया कि साक्षरता केवल पढ़ना और लिखना सीखना नहीं, बल्कि व्यक्ति को आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता प्रदान करने का सशक्त माध्यम है।
“अब मैं हस्ताक्षर कर सकती हूं, पढ़ सकती हूं” — राम प्यारी देवी
जनपद रुद्रप्रयाग की नवसाक्षर राम प्यारी देवी ने अपनी सीखने की यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि उल्लास कार्यक्रम से जुड़ने के बाद वे स्वयं हस्ताक्षर करने, फोन नंबर लिखने एवं याद रखने, हिंदी पढ़ने तथा दैनिक जीवन में भाषा का बेहतर उपयोग करने में सक्षम हुई हैं।
उनका अनुभव इस बात का प्रेरक उदाहरण रहा कि सीखने की इच्छा और अवसर मिलने पर उम्र कभी शिक्षा के मार्ग में बाधा नहीं बनती।
चंपावत में सामुदायिक सहभागिता बनी साक्षरता की ताकत
जनपद चंपावत की स्वयंसेवी मधु ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्वयंसेवकों ने गांवों के बुजुर्गों और असाक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने के लिए प्राथमिक विद्यालयों में शाम के समय कक्षाएं संचालित कीं।
इस अभियान में उल्लास ऐप का भी प्रभावी उपयोग किया गया। स्वयंसेवकों के निरंतर प्रयास और समुदाय की सक्रिय भागीदारी के फलस्वरूप चंपावत को पूर्ण साक्षर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई।
लघु फिल्म में दिखी उत्तराखण्ड की पूर्ण साक्षरता तक की यात्रा
SCERT developed a short film-कार्यक्रम के दौरान एक विशेष लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसमें 1 अप्रैल 2022 से प्रारंभ हुए उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम से लेकर 08 जुलाई 2026 को उत्तराखण्ड द्वारा पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा प्राप्त करने तक की यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
फिल्म में राज्य के विभिन्न जनपदों में संचालित साक्षरता गतिविधियों, स्वयंसेवकों के योगदान, नवसाक्षरों के अनुभवों तथा पर्वतीय एवं विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच अभियान को सफल बनाने के सामूहिक प्रयासों को दर्शाया गया।
उत्तराखण्ड की उपलब्धि पूरे देश के लिए गर्व का विषय — अर्चना शर्मा अवस्थी
भारत सरकार की अपर सचिव अर्चना शर्मा अवस्थी ने उत्तराखण्ड की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि पूर्ण साक्षरता की दिशा में राज्य द्वारा प्राप्त सफलता पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने विशेष रूप से स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इतनी बड़ी उपलब्धि व्यापक जनभागीदारी के बिना संभव नहीं थी।
उन्होंने बताया कि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को पूर्ण साक्षरता प्राप्त करने के लिए वर्ष 2030 तक का लक्ष्य दिया गया है। देश के विभिन्न राज्यों में इस दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है और उल्लास ऐप पर लगभग चार करोड़ पंजीकरण हो चुके हैं।
नवसाक्षरों को शिक्षा से आगे आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर
माननीय शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस उपलब्धि के लिए माननीय मुख्यमंत्री तथा अभियान से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड में साक्षरता अभियान को सफल बनाने में लगभग 25,000 लोगों ने योगदान दिया है।
उन्होंने नवसाक्षरों को बुनियादी साक्षरता तक सीमित न रखते हुए उन्हें आगे की शिक्षा और आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के माध्यम से नवसाक्षरों को कक्षा 2 एवं कक्षा 5 स्तर की परीक्षा एवं प्रमाणन से जोड़ने तथा नवसाक्षर महिलाओं को लखपति दीदी जैसी योजनाओं से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
शिक्षा मंत्री ने राज्य के शिक्षा क्षेत्र से जुड़े तीन प्रमुख लक्ष्यों का उल्लेख किया—
100 प्रतिशत साक्षरता प्राप्त करना, विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर को शून्य करना तथा उच्च शिक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना।
उन्होंने कहा कि पहले दो लक्ष्यों को प्राप्त किया जा चुका है, जबकि उच्च शिक्षा में 50 प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2026 को लक्ष्य वर्ष के रूप में रखा गया है।
उन्होंने राज्य को आगामी तीन वर्षों में नशामुक्त बनाने के लक्ष्य की भी जानकारी दी। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यालय में एक भी बच्चा अध्ययनरत है, तो उस विद्यालय को बंद नहीं किया जाएगा।
“सीखने की कोई उम्र नहीं होती” — मुख्यमंत्री
माननीय मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस अवसर को उत्तराखण्ड के लिए उत्सव और गौरव का दिन बताया। उन्होंने कहा कि पूर्ण साक्षर राज्य बनने की उपलब्धि सरकार के प्रयासों के साथ-साथ शिक्षकों, स्वयंसेवकों, अधिकारियों, नवसाक्षरों और आम नागरिकों की सामूहिक भागीदारी का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति तक साक्षरता का अवसर पहुंचाना चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन दृढ़ संकल्प, सामुदायिक सहभागिता और जनसहयोग ने इसे संभव बनाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “सीखने की कोई उम्र नहीं होती।” शिक्षा व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाने, जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने और उसे आत्मनिर्भर बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में संचालित नंदा गौरा योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि पात्र बालिकाओं को इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने पर ₹51,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड को साक्षरता के क्षेत्र में इस महत्वपूर्ण मुकाम तक पहुंचाने वाले सभी नवसाक्षरों, स्वयंसेवकों, शिक्षकों, अधिकारियों और नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
पूर्ण साक्षरता से आजीवन शिक्षा की ओर बढ़ता उत्तराखण्ड
“उल्लास पर्व” ने यह महत्वपूर्ण संदेश दिया कि पूर्ण साक्षरता किसी अभियान का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि आजीवन शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, कौशल विकास, वित्तीय जागरूकता और आत्मनिर्भरता की नई यात्रा की शुरुआत है।
उत्तराखण्ड की यह उपलब्धि विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, दूरस्थ बस्तियों और विविध सामाजिक परिस्थितियों के बीच स्वयंसेवकों तथा स्थानीय समुदायों ने साक्षरता को जनभागीदारी के अभियान का स्वरूप दिया।
अब नवसाक्षरों को सतत शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल सेवाओं, वित्तीय साक्षरता और आजीविका के अवसरों से जोड़कर इस उपलब्धि को दीर्घकालिक सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन में परिवर्तित किया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में अपर शिक्षा सचिव नमामि बंसल द्वारा सभी अतिथियों, नवसाक्षरों, स्वयंसेवकों, शिक्षकों, SCERT एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों तथा कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
video link- https://youtu.be/v162RTm8Idw





