सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम के माध्यम से विद्यालयों में संवेदनशील, आनंदमय और सकारात्मक शैक्षिक वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर
उधम सिंह नगर, 15 अक्टूबर 2026। समग्र शिक्षा उत्तराखंड के अंतर्गत जनपद उधम सिंह नगर के पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम (Social, Emotional and Ethical Learning – SEEL) कार्यशाला उत्साहपूर्ण सहभागिता और सकारात्मक अनुभवों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों के समग्र विकास के लिए सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक मूल्यों को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना तथा शिक्षकों एवं विद्यालय नेतृत्व को संवेदनशील और आनंदमय शैक्षिक वातावरण विकसित करने के लिए प्रेरित करना था।
समग्र शिक्षा उत्तराखंड के कार्यक्रम प्रभारी डॉ. बी. पी. मैंदोली ने कार्यशाला की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता अत्यंत उत्साहजनक रही। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों, समूह चर्चाओं एवं अनुभवात्मक अधिगम प्रक्रियाओं में रुचिपूर्वक भाग लिया तथा विद्यार्थियों के सामाजिक-भावनात्मक विकास के महत्त्व को गहराई से समझा।
उन्होंने कहा कि SEEL केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यालयी शिक्षा को अधिक मानवीय, संवेदनशील और जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य बच्चों में आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन, सहानुभूति, सकारात्मक संबंध, जिम्मेदार निर्णय लेने की क्षमता तथा नैतिक मूल्यों का विकास करना है।
आनंदम पाठ्यचर्या और समग्र शिक्षा से जुड़ाव
उत्तराखंड की आनंदम पाठ्यचर्या (Anandam Curriculum) की भावना के अनुरूप सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम बच्चों को तनावमुक्त, सुरक्षित और आनंदपूर्ण वातावरण में सीखने के अवसर प्रदान करता है। SEEL जैसी पहल विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सहयोग, करुणा, पारस्परिक सम्मान और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने में सहायक हो सकती है।
कार्यशाला के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षिक उपलब्धियाँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों को भावनात्मक रूप से सशक्त, नैतिक रूप से जिम्मेदार तथा सामाजिक रूप से संवेदनशील नागरिक बनाना भी है। इस दिशा में प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों एवं सहयोगी संस्थाओं का सराहनीय योगदान
कार्यशाला की सफलता में विषय विशेषज्ञों एवं विभिन्न सहयोगी संस्थाओं का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. विजय रावत, पांडे जी एवं रतूड़ी जी ने संदर्भदाता के रूप में अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करते हुए प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
Dream a Dream एवं Labhya की टीमों ने कार्यक्रम के दौरान निरंतर सहयोग एवं तकनीकी-अकादमिक समर्थन प्रदान किया। वहीं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन ने प्रशिक्षण स्थल एवं आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराकर आयोजन में महत्त्वपूर्ण सहयोग दिया।
समग्र शिक्षा, उधम सिंह नगर की टीम ने कार्यक्रम के सफल संचालन, समन्वय एवं व्यवस्थाओं में सराहनीय भूमिका निभाई।
डॉ. बी. पी. मैंदोली ने सभी संदर्भदाताओं, सहयोगी संस्थाओं, आयोजनकर्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही विद्यालयों में सकारात्मक और स्थायी शैक्षिक परिवर्तन संभव है।
खुशहाल, संवेदनशील और भावनात्मक रूप से सशक्त विद्यालयों की ओर
तीन दिवसीय कार्यशाला से प्राप्त अनुभवों और प्रतिभागियों के उत्साह ने यह विश्वास मजबूत किया कि SEEL के सिद्धांतों को विद्यालयों की दैनिक गतिविधियों और शिक्षण प्रक्रियाओं में प्रभावी रूप से अपनाया जा सकता है।
यह पहल पीएम श्री विद्यालयों को ऐसे शिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण है, जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित, स्वीकार्य और सीखने के लिए प्रेरित महसूस करे।
सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक अधिगम का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि बच्चों के हृदय में संवेदनशीलता, व्यवहार में नैतिकता और जीवन में सकारात्मकता विकसित करना है।
इस प्रकार समग्र शिक्षा उत्तराखंड के अंतर्गत आयोजित यह कार्यशाला राज्य में आनंदम पाठ्यचर्या, विद्यार्थी कल्याण और समग्र शिक्षा के उद्देश्यों को सशक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में सामने आई है।
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