पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने किया प्रतिभाग, निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण बंदना गर्ब्याल ने की मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता
देहरादून, 10 अक्टूबर 2026। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर उत्तराखंड में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण एवं सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देहरादून स्थित ट्रांजिट हॉस्टल, रेसकोर्स सेंटर में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जनपद नैनीताल के पीएम श्री विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील एवं सहयोगात्मक वातावरण विकसित करना तथा सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक शिक्षण (Social, Emotional and Ethical Learning–SEEL) को विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने के लिए शिक्षकों को प्रेरित करना था।
निदेशक बंदना गर्ब्याल ने की मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता
कार्यशाला में बंदना गर्ब्याल, निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण, उत्तराखंड मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वहीं डॉ. बी. पी. मैंदोली, स्टाफ ऑफिसर, समग्र शिक्षा उत्तराखंड ने विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल शैक्षिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता, सहयोग और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करना भी है।
मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक-भावनात्मक शिक्षण पर विशेष चर्चा
कार्यशाला में मनोदर्पण सेल के माध्यम से विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों, तनाव, सामाजिक अलगाव और भावनात्मक कठिनाइयों को समझने तथा समय पर आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए संवेदनशील बनाने पर जोर दिया गया।
सामाजिक-भावनात्मक शिक्षण के अंतर्गत विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, सहानुभूति, भावनात्मक संतुलन, संवाद कौशल, जिम्मेदार निर्णय लेने और सहयोगात्मक व्यवहार विकसित करने की आवश्यकता रेखांकित की गई।
डॉ. बी. पी. मैंदोली ने विद्यार्थियों के समग्र विकास में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को स्पष्ट करते हुए शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने शैक्षिक उपलब्धियों के साथ बच्चों की भावनात्मक और सामाजिक क्षमताओं को भी समान प्राथमिकता देने पर बल दिया।
सहयोगी संस्थाओं ने साझा किए नवाचारी अनुभव
कार्यशाला में Dream a Dream एवं Labhya Foundation जैसी सहयोगी संस्थाओं ने विद्यालयों में सामाजिक-भावनात्मक शिक्षण, जीवन कौशल और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने से संबंधित अपने अनुभव एवं कार्यप्रणालियां साझा कीं।
इन संस्थाओं ने अनुभव-आधारित गतिविधियों, समूह शिक्षण, सकारात्मक संवाद तथा सहयोगात्मक कक्षा-कक्ष वातावरण के माध्यम से विद्यार्थियों के भावनात्मक विकास को प्रोत्साहित करने के विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
विद्यालय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
प्रतिभागी प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने कार्यशाला से प्राप्त अनुभवों को विद्यालयों की नियमित गतिविधियों में शामिल करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इसके अंतर्गत प्रार्थना सभा, समूह चर्चा, रचनात्मक गतिविधियों, सहपाठी सहयोग और विद्यार्थियों के साथ नियमित संवाद के माध्यम से सकारात्मक विद्यालयी वातावरण विकसित करने पर सहमति बनी।
विद्यालयों में बच्चों को बिना भय और संकोच अपनी भावनाएं व्यक्त करने, समस्याएं साझा करने तथा आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराना इस पहल का महत्वपूर्ण पक्ष रहा।
समावेशी एवं बाल-केंद्रित शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित यह कार्यशाला उत्तराखंड में बाल-केंद्रित, समावेशी एवं संवेदनशील विद्यालयी शिक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की समग्र एवं अनुभवात्मक शिक्षा की भावना के अनुरूप ऐसी पहलें विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक विकास के साथ-साथ उनके सामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास को भी मजबूत बनाने में सहायक हो सकती हैं।
कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि एक अच्छा विद्यालय केवल वह नहीं है जहां बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें, बल्कि वह भी है जहां प्रत्येक बच्चा स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित, प्रसन्न और आत्मविश्वास से परिपूर्ण महसूस करे।
उत्तराखंड में इस प्रकार के प्रयास शिक्षकों, विद्यालय प्रमुखों, अभिभावकों एवं सहयोगी संस्थाओं के सामूहिक योगदान से बच्चों के लिए अधिक संवेदनशील, सकारात्मक और खुशहाल शिक्षण वातावरण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
