Wednesday, October 15, 2025

राज्य स्तरीय विज्ञान संगोष्ठी 2025 — क्वांटम युग का आगाज़ : संभावनाएं और चुनौतियां


दिनांक: 13 अक्टूबर 2025

स्थान: एशियन एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, एंचोली, जनपद पिथौरागढ़

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उत्तराखंड के तत्वावधान में राज्य स्तरीय विज्ञान संगोष्ठी 2025 का भव्य आयोजन जनपद पिथौरागढ़ के एशियन एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, एंचोली में किया गया। इस आयोजन में 13 जनपदों के 24 बाल वैज्ञानिकों ने “क्वांटम युग का आगाज़ : संभावनाएं और चुनौतियां” विषय पर अपने अभिनव विचार और शोध प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती कल्पना देवलाल, मेयर पिथौरागढ़; विशिष्ट अतिथि डॉ. हेमचंद्र पांडे, निदेशक, एल.एस.एम. परिसर पिथौरागढ़; श्री पद्मेंद्र सकलानी, अपर निदेशक, SCERT; तथा राज्य विज्ञान समन्वयक डॉ. देवराज सिंह राणा द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया।

अपने उद्घाटन संबोधन में मेयर कल्पना देवलाल ने सभी बाल वैज्ञानिकों से विज्ञान और तकनीकी की नई संभावनाओं को पहचानने तथा भविष्य की चुनौतियों का सामना करने का आह्वान किया।
डॉ. हेमचंद्र पांडे ने क्वांटम भौतिकी के सिद्धांतों को विस्तारपूर्वक समझाते हुए आधुनिक विज्ञान की भूमिका और महत्व पर प्रकाश डाला। अपर निदेशक परिषद पद्मेंद्र सकलानी ने प्रतिभागियों को अपने जीवन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने एवं विकसित करने पर बल दिया।

कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. देवराज सिंह राणा ने संगोष्ठी की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक खोज, विश्लेषणात्मक प्रवृत्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करना है। प्रत्येक प्रतिभागी को 6 मिनट का प्रस्तुतीकरण और 2 मिनट का प्रश्नोत्तर सत्र प्रदान किया गया।
 इस प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभाई —

  • डॉ. गरिमा पुनेठा, असिस्टेंट प्रोफेसर, एल.एस.एम. परिसर, पिथौरागढ़

  • डॉ. योगेश कोठारी, असिस्टेंट प्रोफेसर, सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज, पिथौरागढ़

  • गौरव कुमार, उपनिदेशक, एन.आई.सी., पिथौरागढ़

राज्य विज्ञान संगोष्ठी 2025 के विजेताओं ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से सबका मन मोह लिया —

  1. निर्मल पवार, राजकीय इंटर कॉलेज, जखण्ड — प्रथम स्थान
  2. शोभित दुर्गापाल, अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज, फूलचौड़, नैनीताल — द्वितीय स्थान
  3. कुमारी यशस्वी जोशी, सोर वैली स्कूल — तृतीय स्थान

समापन सत्र की अध्यक्षता  त्रिभुवन प्रसाद, सहायक कमांडेंट, 55वीं एस.एस.बी. पिथौरागढ़ द्वारा की गई। उन्होंने सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया।

समाजसेविका और शिक्षिका  लक्ष्मी बल्दिया ने सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहन स्वरूप एक डायरी भेंट की।

राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त निर्मल पवार आगामी राष्ट्रीय विज्ञान संगोष्ठी में, जो कि 30 अक्टूबर 2025 को विश्वेश्वरैया औद्योगिक एवं तकनीकी संग्रहालय, बेंगलुरु (कर्नाटक) में आयोजित होगी, उत्तराखंड राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे।

इस अवसर पर एशियन एकेडमी की निदेशक डॉ. संध्या पाल, प्रधानाचार्य  एम.एस. बोरा, जनपद विज्ञान समन्वयक डॉ. विकास पंत, तथा SCERT से नीलम पंवार, प्रवक्ता, सहित अनेक शिक्षक और छात्र उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन डॉ. देवराज सिंह राणा द्वारा सभी अतिथियों, निर्णायकों और प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

यह संगोष्ठी न केवल विद्यार्थियों के लिए एक सीखने का मंच सिद्ध हुई, बल्कि विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार, खोज और रचनात्मकता को भी नई दिशा प्रदान करने वाली रही।

DIET Bhimtal Nainital — “बिना अनुभव के सीखना असम्भव” : आशुतोष

 

शिक्षण केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत अनुभव की प्रक्रिया है। “सिखाना अनुभव से ही सम्भव है, बिना अनुभव के सीखना सरल नहीं है,” यह प्रेरक विचार ख्यातिप्राप्त शिक्षाविद् एवं विज्ञान खोजशाला के संस्थापक आशुतोष उपाध्याय ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) भीमताल, नैनीताल में आयोजित चार दिवसीय कार्यशाला के दौरान व्यक्त किए।

आशुतोष उपाध्याय ने कहा कि विषय में रुचि पैदा करना शिक्षक का मुख्य कार्य है। जब तक विद्यार्थी विषय में आनंद और जिज्ञासा महसूस नहीं करेंगे, तब तक शिक्षण प्रभावी नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हर कक्षा में शिक्षक को विद्यार्थियों के अनुभवों से जुड़कर सीखने का अवसर देना चाहिए, जिससे शिक्षा जीवन से सार्थक रूप से जुड़ सके।


कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. शैलेन्द्र सिंह धपोला ने बताया कि शिक्षण में रुचि जागृत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत “बस्ता रहित दिवसों” (Bagless Days) की अवधारणा विकसित की गई है। इन 10 दिवसीय गतिविधियों को अब PARAKH राष्ट्रीय सर्वेक्षण की अनुशंसाओं के साथ जोड़ा जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों की सीखने की न्यून उपलब्धियों (Learning Outcomes) को सुधारा जा सके।

कार्यशाला संयोजक डॉ. प्रेम सिंह मावड़ी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्पष्ट रूप से गतिविधि आधारित शिक्षण (Activity-Based Learning) और दक्षता विकास (Competency Development) पर बल दिया गया है। इसी क्रम में चार दिवसीय इस कार्यशाला में शिक्षकों और डी.एल.एड. प्रशिक्षुओं द्वारा विविध शिक्षण मॉडल तैयार किए जा रहे हैं।

इन मॉडलों में “जादुई हाथ”, “सौरमंडल”, “रंगबिरंगे गिरगिट”, “कछुए का गणित” जैसी रचनात्मक गतिविधियाँ शामिल हैं, जिनसे विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास हो सके।


कार्यशाला में डॉ. विमल किशोर, ललित प्रसाद तिवारी, डॉ. सुमित पांडे, डॉ. पूरन सिंह बंगला सहित जनपद के 40 शिक्षक एवं डी.एल.एड. प्रशिक्षु सक्रिय रूप से प्रतिभाग कर रहे हैं।

यह कार्यशाला इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब शिक्षण में अनुभव और गतिविधि का समन्वय होता है, तब शिक्षा केवल सिखाने का माध्यम नहीं रह जाती, बल्कि जीवन जीने की कला बन जाती है।

Tuesday, October 14, 2025

Workshop on Mission Karmyogi Orientation for Departmental Nodal Officers

 

Dehradun, October 14, 2025

A one-day orientation workshop under the Mission Karmyogi initiative was organized at the Pandit Deendayal Upadhyay State Institute of Financial and Administrative Management (CFAM), Dehradun, under the supervision of Dr. R.S. Tolia of the Uttarakhand Academy of Administration, Nainital. The workshop aimed to strengthen the understanding and implementation of ethical and effective governance practices in alignment with the Mission Karmyogi framework.

Representing the Academic, Research, and Training Unit, Uttarakhand, Ramesh Badoni and Dr. Jamohan Rawat participated in the workshop as designated Nodal Officers.

During the session, Director Academic, Bandana Garbyal, emphasized the importance of this orientation for the nodal officers. She advised both participants to complete the Mission Karmyogi training modules and ensure that all departmental and district education officers are onboarded onto the official Mission Karmyogi portal.


This initiative marks an important step in promoting continuous learning, performance improvement, and accountability within the education system of Uttarakhand.

Official Portal: Mission Karmyogi – iGOT Platform